शुरुआत वहां से होती है जब एक प्रेमी जुगल ने सब हिती रिश्तेदारों को सूचना दी,की अब वो माँ बाप बनने वाले हैं।गर्भावस्था से ही अपने अंजान मेहमान से लिए सपनो का महल सजाया ,उसके लिए दुनिया की हर ख़ुशी की तैयारी अभी से शुरू हो गयी।नन्हे मेहमान के आते ही सब कुछ झोंक दिया उसपर।विशिष्ट लालन पालन में बच्चा बढ़ने लगा।शिक्षा दीक्षा उत्तम संस्कार दिए । एक बेहतर सामाजिक व्यक्ति बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी,अच्छी शिक्षा व्यवस्था के साथ साथ उम्मीदों के सागर भी मन गंगा में हिलोरे मारने लगे। उम्मीद और व्यवहारिक जीवन में ,माँ बाप के संस्कार सामंजस्य बैठाते हुए जिंदगी इस उम्मीद में आसान होती गयी की दुखों के सफर का पता ही न चला।
माँ बाप को लगने लगा की ईश्वर ने ऐसा चमत्कार किया कि हमारा सोचा ,हमारा देखा सपना ये तो सब पूरा करता चला गया।हर उम्मीद हर मुकाम चढ़ता गया ,सांसारिक दुनियादारी से बेगाना माँ बाप के सपनो को ही अपना समझता गया।जब अपने सपने बुनने की बारी आई तो आसमान ही गिर पड़ा।पर डिगा नहीं क्योंकि बचपन के संस्कार और सज्जनों का संग ईश्वर की कृपा से मजबूत होता गया।
गुजरे समय में जब पीछे झांक कर देखा तो पता चला न जिम्मेदारियां ही निभ रही न सपने ही साज रहे।बहुत खंगालने के बाद समझ आया की किताबी ज्ञान तो बस डिग्री के लिए ही था।अब बाकि अंजान दुनिया से निपटने के लिए तो उनकी जरूरत ही न थी।
जिंदगी भर अच्छे संस्कारो ने पैर पकड़ रकहे थे,समाज में झूठे,लुच्चे,चोर इन सबका अच्छा बोलबाला होता देख रोज यही लगता कि क्या अच्छा होना इतना बुरा है।ये ऐसी स्थिति थी की अच्छा रहा नहीं जाये और बुरा बना नहीं जाये।
ये जिम्मेदारी ने पैर पकड़ रख़े थे,जीवन में वो कुछ भी करने को जी करने लगा जो की समाजिक स्तर से हटकर था ।पर और कोई राश्ता भी न था ,जिम्मेदारियां तो थी ही ऐसी।
पहले हम बच्चे को अच्छा इंसान बनने में पूरा जीवन झोंक देते हैं,फिर हम उसको सफलता के नए आयाम सिखाते हैं।
पहले हम उसे शांत सुशील और सभ्य बनाना चाहते हैं,फिर उसे तेज।
पहले हम दूसरों की भावनाओं को समझना सिखाते हैं,फिर हम तोडना।
बदलना होगा समाज की सोच को।पहले ही दूर तक सोच लीजिये क्योंकि ये जीवन कोई सामान नहीं की जिसे जब चाहो किसी भी रंग में रंग दिया जाये।
उम्मीदें समय पर संभल जाएँ तो अच्छा है वर्ना उन्ही गंदे लोगो के साथ बैठेगा और शराब को पीते हुए अच्छे संस्कारो को सिगरेट के धुएं में उड़ा देगा।
"जीवन माँ बाप के हाथ में है,अगरबत्ती या सिगरेट "किसका धुआं पसंद है आपको, समय से चुन लिए।
बाद में पछताने से क्या होगा!
विपिन कुमार मिश्रा
9654816391
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